हाँ तो भई, आ गया एक भोपाली ब्लॉग मार्केट मे.…. और किसी से भी ज्यादा मुझे खुद ही इस ब्लॉग का इंतज़ार था । क्या कहाँ, क्यूँ, अरे भाई पटिया अब भोपाल से गायब सा हो रहा है, अब आधी रात हमारे पुलिस वाले कहाँ गप मारने देते है। …. लेकिन ये ऑनलाइन पटिया है जब चाहे आ कर बैठ गए और बक दिया कुछ भी अंड बंड।
वाह वाह भी होगी, गालिया भी मिलेंगी और ताने भी कसे जायेंगे। भई वाह, मज़ा आ जायेगा, चाय बिस्कुट मिले न मिले लेकिन बातों का स्वाद तो मिलेगा ही।
अरे हाँ , ये ना समझे की यहाँ सिर्फ भोपाली allowed है । अरे खां ऐसे भी कभी भोपाल में हुआ है भला, यहाँ सब allowed है। जी हाँ पटिया सब का है और सब इसके । तो आइये फिर जुड़ जाइये इस भोपाली और उसके पटिये के साथ.…खुशामदीद ।
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